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गीत

शहीद-ए-आज़म - गोकुल कोठारी
  सृजन तिथि : 2017
वतन के लिए ओढ़े जो कफ़न, कहलाए वो शहीद-ए-आज़म। न रास आया ज़ुल्मों सितम, यूँ कहलाए वो शहीद-ए-आज़म। जिनकी हुकूमत का न डूबा उ
तिरंगा ऊँचा रहे हमारा - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 13 अगस्त, 2022
भारत मातृभूमि तुझे नमन, नमन तिरंगा शान तुम्हारा। कल आज और कल का भारत, चहुँ कीर्ति पताका जय न्यारा। सबसे प्यारा ह
समझाया हमने कि हम भी जले हैं - गोकुल कोठारी
  सृजन तिथि : 22 अप्रैल, 2022
सज धज पतंगे कहाँ को चले हैं, समझाया हमने कि हम भी जले हैं। निकला है घर से फिर इक दीवाना, कहता है मुझको मोहब्बत निभाना
तब किसी की याद आती - गोपालदास 'नीरज'
  सृजन तिथि :
तब किसी की याद आती! पेट का धंधा ख़त्म कर लौटता हूँ साँझ को घर बंद घर पर, बंद ताले पर थकी जब आँख जाती। तब किसी की याद
यादों की बारात सजाऊँ - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 24 जुलाई, 2022
यादों की बारात सजाऊँ, बचपन फिर लम्हें जी पाऊँ। माता की ममता छाया तल, पा सुकून फिर से सो जाऊँ। बाबूजी भय से सो जाऊँ,
मेरा मन मंदिर भी शिवाला है - आशीष कुमार
  सृजन तिथि : 25 जुलाई, 2022
बाबा बसे हो काशी नगरिया काशी नगरिया हो काशी नगरिया कभी तो आओ हमरी दुअरिया हमरी दुअरिया हो हमरी दुअरिया। मेरा मन
आओ शमा जलाएँ - संजय राजभर 'समित'
  सृजन तिथि : 29 अप्रैल, 2022
भटक रहा है क्यूँ दर-दर, स्वयं को अब जगाएँ। अंतःकरण में तमस है, आओ शमा जलाएँ। सुंदर-सुंदर बातें भी, अमल बिन सब व्यर्
अब ना सखी मोहे सावन सुहाए - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 5 जुलाई, 2020
अब ना सखी मोहे सावन सुहाए, अब ना सखी मोरा मन मचलाए। अब तो सही मोहे पिया बिसराए, अब तो सखी मोहे रिमझिम जलाए। अब नहीं क
बैरी सावन - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 16 जुलाई, 2022
हाय रे आया बैरी सावन, आवन कह गए आए न साजन। रहती हूँ मैं खोई-खोई, रोग लगा है जैसे कोई। कब से न मैं तो चैन से सोई। सुनी
आज मुझसे बोल, बादल! - हरिवंश राय बच्चन
  सृजन तिथि :
आज मुझसे बोल, बादल! तम-भरा तू, तम-भरा मैं, ग़म-भरा तू, ग़म-भरा मैं, आज तू अपने हृदय से हृदय मेरा तोल, बादल! आज मुझसे बोल
दीपक जलता रहा रात भर - गोपाल सिंह नेपाली
  सृजन तिथि :
तन का दिया, प्राण की बाती, दीपक जलता रहा रात भर। 1 दुख की घनी बनी अँधियारी सुख के टिमटिम दूर सितारे उठती रही पीर की ब
मेरा धन है स्वाधीन क़लम - गोपाल सिंह नेपाली
  सृजन तिथि :
मेरा धन है स्वाधीन क़लम राजा बैठे सिंहासन पर, यह ताजों पर आसीन क़लम जिसने तलवार शिवा को दी रोशनी उधार दिवा को दी
तुम आग पर चलो - गोपाल सिंह नेपाली
  सृजन तिथि :
1 अब वह घड़ी गई कि थी भरी वसुंधरा वह घड़ी गई कि शांति-गोद थी धरा जिस ओर देखते न दीखता हरा-भरा चहुँ ओर आसमान में घना धु
बिन पानी के धरती सूनी - डॉ॰ ममता बनर्जी 'मंजरी'
  सृजन तिथि : 2021
हमें जिलाए रखता पानी, है जीवन आधार। बिन पानी के धरती सूनी, सूना यह संसार।। भोजनादि के लिए ज़रूरी, पानी का उपयोग। साफ़
भूमिपुत्र - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 25 मई, 2022
खेतों से जो रत्न उगलते, कृषकों का सम्मान करो। भूमिपुत्र हैं ये पालक हैं, जय किसान कह मान करो। ख़ून पसीना बहा बहाकर,
दिया जलता रहा - गोपालदास 'नीरज'
  सृजन तिथि :
जी उठे शायद शलभ इस आस में रात भर रो रो, दिया जलता रहा। थक गया जब प्रार्थना का पुण्य, बल, सो गई जब साधना होकर विफल, जब
जब यार देखा नैन भर - अमीर ख़ुसरो
  सृजन तिथि :
जब यार देखा नैन भर, दिल की गई चिंता उतर, ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाय कर। जब आँख से ओझल भया, तड़पन लगा मेरा जिया, हक
है मुबारकबाद मेरी ज़िंदगी ख़ुशहाल रखना - अभिनव मिश्र 'अदम्य'
  सृजन तिथि : 9 जून, 2022
लाल जोड़े को पहनकर जा रही हो तुम गली से, है मुबारकबाद मेरी ज़िंदगी ख़ुशहाल रखना। कर रहीं थी प्रेम पर तुम प्राण भी अपने
पुत्र का संदेश - अभिनव मिश्र 'अदम्य'
  सृजन तिथि : 5 जून, 2022
ओ चतुर कागा! हमारे गाँव जाना। पुत्र का संदेश उस माँ को सुनाना। मातु से कहना कि उसका सुत कुशल है, याद वो करता उन्हें
सजन स्वप्न में आए थे - संजय राजभर 'समित'
  सृजन तिथि : 7 जून, 2022
धीरे-धीरे नहा उठी थी, जब अहसास कराए थे। सखी रात की बात बताऊँ, सजन स्वप्न में आए थे। जब ज़ुल्फ़ों को सहलाकर वो, खींच बा
अग्निवीर - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 22 जून, 2022
हम अग्निवीर सीमा प्रवीर, बलिदान राष्ट्र पथ जाते हैं। हम शौर्यवीर गंभीर धीर, स्वाभिमान विजय रण गाते हैं। हम महाज
जय बजरंगी - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 20 मई, 2022
जय महावीर जय बजरंगी, तेरा ही एक सहारा है। विपदा के बादल छाँटो प्रभु, तेरे बिन कौन हमारा है। प्रभु रोग शोक अवसाद हर
अभी बाक़ी है - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 1 अप्रैल, 2021
तू मुझमें अभी बाक़ी है, तू मुझमें कहीं बाक़ी है। ये तेरा ही तो साया है , ये अब भी मेरा साथी है। ये तेरा ही तो जलवा है, ये
पहली मुहब्बत - अभिनव मिश्र 'अदम्य'
  सृजन तिथि : 1 मई, 2022
हृदय पत्रिका पर प्रणय की कहानी, नहीं भूल पाया वो यादें पुरानी। हमारी हक़ीक़त थी वो, पहली मुहब्बत थी वो। नयन से नयन ज
स्कूल चलें हम - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 15 जून, 2022
आओ हम सब बच्चे भारत, नौनिहालों साथ स्कूल चलें। अ आ इ ई क ख ग घ पाठ ज्ञान, हम भारतीय इन्सान बनें। ज्ञानोदय नव भोर कि
स्याह रजनी को हरा कर - सीमा 'वर्णिका'
  सृजन तिथि : 5 मई, 2022
कौमुदी थिरके धरा पर, स्याह रजनी को हरा कर। साँझ ले आती उदासी, चाहतें लेती उबासी। छोड़ कर हम को अकेले, नींद बैरन है
मैं एक पत्रकार हूँ - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 30 मई, 2022
मैं एक पत्रकार हूँ, मैं एक पत्रकार हूँ। समाज का हूँ आईना, अवाम का ग़ुबार हूँ। कहाँ पे क्या सही हुआ, कहाँ पे क्या ग़लत
सलोने चाँद आ - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 22 मई, 2022
मैं तुझे दर्पण बना लूँ, ऐ! सलोने चाँद आ। प्यार के दो क्षण चुरा लूँ, ऐ! सलोने चाँद आ। चाँदनी को है ख़ुमारी, रात का भी नृ
प्रेम युगल जीएँ कुछ लम्हें - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 9 मई, 2021
कुछ पल तेरे संग बिताएँ, स्वप्निल दुनिया साथ रचाएँ। जिए साथ हम बन हमजोली, नवजीवन आलोक जगाएँ। अन्तर्मन अवसाद भुला
प्यारी माँ - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 5 अप्रैल, 2021
चंदन जैसी माँ तेरी ममता, तेरी मिसाल कहाँ दूँ माँ। जनम मिले गर फिर धरती पर, तेरा ही लाल बनूँगा माँ। तूने कितनी राते

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