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अंधविश्वास अखबार अधिकार अपराध अनमोल अब्दुल कलाम अभिलाषा अरमान अवसाद असफलता अहंकार


आँख आँसू आईना आकाश आत्मनिर्भर आत्महत्या आदत आदमी आधुनिकता आंनद आयु आवाज़


इंसान इंसानियत इश्क़


ईद ईश्वर


उद्देश्य उम्मीद उम्र


"ऊ" से अभी कोई विषय मौजूद नहीं है।



एकता


"ऐ" से अभी कोई विषय मौजूद नहीं है।



"ओ" से अभी कोई विषय मौजूद नहीं है।



"औ" से अभी कोई विषय मौजूद नहीं है।



क़ब्र कमजोरी कर्म कलम कवि काँटा कामना कामयाब कारगिल विजय दिवस किताब किसान किस्मत कुदरत कृष्ण जन्माष्टमी


ख़ामोशी खुशबू खुशी खेल ख़्याल ख़्वाब


ग़म गरीब गाँधी जयंती गाँव गुरु पूर्णिमा गैर


घर


चन्द्रशेखर आजाद चाँद चाय चाहत चिंता चुनाव चुनौती चूड़ियाँ चेहरा चैन


छठ पर्व छाँव


जनता जमाना जमीन जल जवानी जान जानकारी ज़िंदगी जीवन


"झ" से अभी कोई विषय मौजूद नहीं है।



"ट" से अभी कोई विषय मौजूद नहीं है।



"ठ" से अभी कोई विषय मौजूद नहीं है।



डर डोली


"ढ" से अभी कोई विषय मौजूद नहीं है।



तन्हा तारा तिरंगा तीज तीर्थ तुलसीदास


"थ" से अभी कोई विषय मौजूद नहीं है।



दर्द दान दिल दिवाली दीया दीवाना दुःख दुर्घटना दुश्मन दुश्मनी दुष्कर्म दूर देर देश देशभक्ति दोस्ती दौर


धन धनतेरस धरती धूप धैर्य


नज़र नफ़रत नव वर्ष नवरात्रि नाग पंचमी नारी नास्तिक निर्णय निंद न्याय


पक्षी पत्थर परछाई परवाह परिवर्तन परिवार पर्यावरण पशु पहचान पास पिता पितृ पक्ष पूजा पूर्णिमा पृथ्वी पेड़ पौधे प्यार प्रकृति प्रतीक्षा प्रार्थना प्रिय प्रेम प्रेमचंद प्रेरक


फरिश्ता फूल फौजी


बचपन बच्चे बहन बाघ बात बाबा साहब बारिश बुद्ध पूर्णिमा बूढ़ी बेटी बेरोजगारी बेवफ़ाई


भक्ति भगवान भगवान कृष्ण भगवान गणेश भगवान बुद्ध भगवान राम भगवान विश्वकर्मा भगवान शिव भगवान हनुमान भाई भाग्य भारत भावना भूख भूल भोजन भोर भ्रूण हत्या


मंज़िल मजदूर मजाक मधुशाला मन मर्यादा मसीहा महत्व महबूबा महान माँ माँ काली माँ दुर्गा माता पिता मानव मानवता मालिक मिट्टी मुलाकात मुस्कान मुसाफिर मृत्यु मोहब्बत मौत मौन मौसम


यात्रा याद युवा योग योगदान


रंग रक्षा बंधन राज राजनीति राजा राधा कृष्ण रावण राष्ट्र रिश्ता रोटी


लड़की लफ़्ज़ लम्हा लहू लेखक लॉकडाउन लोग


वक़्त वतन वफ़ा विजय विदा विश्वास वृक्ष वृद्ध व्यथा व्यर्थ व्यवहार


शक्ति शब्द शरद पूर्णिमा शरद ऋतु शराब शहीद शांति शान शिक्षक शिक्षा शिष्टाचार शोक श्रद्धांजलि श्रम श्राद्ध श्रृंगार


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हत्या हमसफर हाथी हिंदी भाषा हृदय हैवानियत

क्ष

"क्ष" से अभी कोई विषय मौजूद नहीं है।


त्र

"त्र" से अभी कोई विषय मौजूद नहीं है।


ज्ञ

ज्ञान
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विधा/विषय " - गीत"

बेबस ज़िन्दगी - प्रवीन 'पथिक'
  सृजन तिथि : 17 सितम्बर, 2016
मूक हो के ज़िन्दगी, बहुत कुछ कह जाती है, कभी देती ग़म तो, कभी ख़ुशी दे जाती है। नहीं है पता इसका, कहाँ है ठिकाना, कहाँ इ
श्याम बिन राधा अधूरी - अभिनव मिश्र 'अदम्य'
  सृजन तिथि : 25 अगस्त, 2021
न जाओ छोड़कर मोहन, ये राधा रह न पाएगी। बहेंगे अश्रु आँखों से, अधर मुस्कान जाएगी। हुई क्या भूल मुझसे जो, दिया है ग़म हम
ज़िम्मेदारी - अभिनव मिश्र 'अदम्य'
  सृजन तिथि : 25 अगस्त, 2021
फ़ैशन करना वो क्या जानें, जिनपर घर की ज़िम्मेदारी। क्या जाने हम नेक अनाड़ी, महँगा फोन अपाचे गाड़ी। नही गया होटल में खा
माँ फिर से वापस आ जाओ - संजय राजभर 'समित'
  सृजन तिथि : 8 अगस्त, 2019
हे! माँ फिर से वापस आ जाओ। लोरी मधुरिम कंठ सुना जाओ।। मात! दंतहीन, बलहीन हूँ मैं, अब अस्सी बरस का दीन हूँ मैं। बाँहे
गाऊँ कैसे प्रेम तराने - अभिनव मिश्र 'अदम्य'
  सृजन तिथि : 11 अगस्त, 2021
टूट गया जब दिल का दर्पण, दर्द भरा गुज़रा है हर क्षण, याद कभी उसकी आती तो, पड़ते अश्रु बहाने। गाऊँ कैसे प्रेम तराने! पी
चलो साथियो संग संग चलो - कमला वेदी
  सृजन तिथि : 15 जून, 2020
चलो साथियो संग संग चलो, दीन दुखियों की गूँज बनते चलो। चलो साथियो... पहुँच गए हम चाँद सितारों तक, जो दब कर रह गए, उन्हे
वही तो भारत मेरा है - प्रवीन 'पथिक'
  सृजन तिथि : 12 अगस्त, 2021
जहाँ आता बसंत-बयार, कोयल भी करती गुंजार। पपीहा की है पीन-पुकार, आल्हा की गूँजती झंकार। वही तो भारत मेरा है।। आदर्
सावन पर भी यौवन - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : 5 अगस्त, 2021
छमछम छमछम नाची है बरखा, झम झम बरसे रे पानी। देखो मिलन की रुत आई है, लिखने को प्रेम कहानी। मधुबन भी है मदहोशी में डूब
जब तेरी याद आती है - प्रवीन 'पथिक'
  सृजन तिथि : 1 जून, 2012
जब-जब आँखें नीर बहाए, सपनों में तुझको न पाए। यही सोचकर घबराए, कि तू उससे कहीं दूर न जाए। हृदय ये भाव जगाती है, जब तेर
विरह पीड़ा - संजय राजभर 'समित'
  सृजन तिथि : 2 अगस्त, 2021
विरह पीड़ा में तप रहा था, अंतः में अनुराग लिए। कब के बिछड़े आज मिले हैं, हम सावन में प्राणप्रिये। हाड़ कँपाती शिश
लोरी - प्रवल राणा 'प्रवल'
  सृजन तिथि : 27 जून, 2020
मेरे लाल आजा सो जा, चंदा भी सो गया है। निंदिया बड़ी ही प्यारी तेरी राह तक रही है। तेरे इंतज़ार में तेरी माता भी जग रही ह
प्रिये, अब तुम आ जाओ - प्रवीन 'पथिक'
  सृजन तिथि : जुलाई, 2021
तड़प रहा हृदय ये मेरा, सूरत तो दिखला जाओ। साँझ हो रही मन मधुबन में, प्रिये, अब तुम आ जाओ। कितने दिवस यूँ चले गए, कितन
मिलन - संजय राजभर 'समित'
  सृजन तिथि : 26 जुलाई, 2021
सावन ने ली जब अँगड़ाई, तब सुधि आई है मधुकर को। चौंक गई मैं उन्हें देखकर, लौटे पिया अचानक घर को। प्यासी नज़रें सबसे च
मेरा सावन सूखा सूखा - अभिनव मिश्र 'अदम्य'
  सृजन तिथि : 27 जुलाई, 2021
विरह व्यथा की विकल रागिनी, बजती अब अंतर्मन में। कितनी आस लगा बैठे थे, हम उससे इस सावन में। बरस रहे हैं मेघा काले फि
इन वादियों में - कमला वेदी
  सृजन तिथि : 2021
इन वादियों में आकर दिल मेरा बहल गया, बहार देखकर हर तरफ़, मेरा मन मचल गया। इन वादियों में... रंग बिरंगे पुष्पों को चूम त
प्रकृति संरक्षण - संजय राजभर 'समित'
  सृजन तिथि : 2021
सुन बदरा रे! हैं विकल जीव सारे, शिथिल सब थके हारे। तप्त हलक अधरा रे! सुन बदरा रे! सूखे ताल-तलैया, अब कौन ले बलैया?
सुन री हवा तू धीरे चल - गाज़ी आचार्य
  सृजन तिथि : 14 जून, 2021
सुन री हवा तू धीरे चल उसके सर से दुपट्टा सरक रहा है... सज सँवरकर निकली है वो यहाँ सारा चमन महक रहा है। सौन्दर्य ऐसे
आप भी आ जाइए - सतीश मापतपुरी
  सृजन तिथि : 1976
कब तलक मैं यूँ अकेला इस तरह जी पाऊँगा। इस निशा नागिन के विष को कैसे मैं पी पाऊँगा। इस ज़हर में अधर का मधु रस मिला तो जा
प्यार वही है - प्रवीन 'पथिक'
  सृजन तिथि : मई, 2009
टूट गई तलवार मगर धार वही है, छूट गई मुलाक़ात मगर प्यार वही है। ऐसा कोई संयोग कहाँ, जिसमें छुपा वियोग न हो मिलता उसे
एक तुम जो छेड़ दो - कमला वेदी
  सृजन तिथि : 2021
एक तुम जो छेड़ दो हज़ारों तरंगे उत्पन्न हो जाए ह्रदयतल में, तुम जो करो निगहबानी शत् शत् कमल दल खिले अन्त:तल में, अपने
हौसला - समुन्द्र सिंह पंवार
  सृजन तिथि : 14 जनवरी, 2021
ना रहता सदा अँधेरा, नित होता नया सवेरा, नित होती है प्रभात, और नित बदल रहे हालात। कर हौसले के साथ, अपनी ज़िंदगी की शुर
सावन की बरसात - गाज़ी आचार्य
  सृजन तिथि : जुलाई, 2021
आया बरसात का मौसम झूमले, बादल आए झूम झूमके और बादलों को चूमले। ऋतु बदली गया ज्येष्ठ आषाढ़ साल का था इंतज़ार माह बद
कैसी दुनिया - सरिता श्रीवास्तव 'श्री'
  सृजन तिथि : 8 जुलाई, 2021
ईश्वर कैसी दुनिया है तेरी, यहाँ रोते लोग हज़ारों हैं। मंदिर में छप्पन भोग लगें, प्रभु फल मेवा भण्डारे चुगें, तरसते
सौंदर्य - सतीश मापतपुरी
  सृजन तिथि : दिसम्बर, 2020
तुम खुले केश छत पे ना आया करो, शब के धोखे में चँदा उतर आएगा। बेसबब दाँत से होंठ काटो नहीं, क्या पता कौन बे-वक़्त मर जाए
जगत जननी दुर्गमा - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : अप्रैल, 2020
हे! माँ जगत जननी दुर्गमा, अब विश्व का कल्याण कर दे। हम सभी तो शिशु तुम्हारे, प्यार का आँचल प्रहर दे। हे! दयामयि हे!
आवारा परदेशी - अभिनव मिश्र 'अदम्य'
  सृजन तिथि : जून, 2021
मै आवारा परदेशी हूँ, मेरा नही ठिकाना रे, ओ मृग नयनों वाली सुन ले, मुझसे दिल न लगाना रे। जब तीर नज़र का किसी जिगर को पा
जाने क्यों लोग - राम प्रसाद आर्य
  सृजन तिथि : 2021
जाने क्यों लोग राह से यों, भटक जाते हैं। जाने क्यों लोग...।। दर्द सह लेते हैं, दवा नहीं लेते हैं। दर्द सस्ता, दवा को म
बस यही कहानी है - शमा परवीन
  सृजन तिथि : 2021
पापा की परियों की बस यही कहानी है, आँखो मे है सपने और थोड़ा सा पानी है। जुनून है हौसला है आगे बढ़ने के लिए, इस लिए सब
फागुन में - पारो शैवलिनी
  सृजन तिथि : 2021
उनकी यादें सताने लगे फागुन में। कोयलिया कूकी डारी पे लगा मुझे तुम बुला रही हो। बंशी सी माधुरी सूरों में सरगम डोर ब
जब यादें उनकी आती - प्रवीन 'पथिक'
  सृजन तिथि : 2021
जब यादें उनकी आती, आँखें-आँसू भर लाती। थी जब साथ वो मेरे, रहता दुःख अधिक घनेरे। आँखों में सपनें उनके, लेकर ख़ुशियाँ

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