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हाइकु

नारी - संजय राजभर 'समित'
  सृजन तिथि : 14 अगस्त, 2019
नारी सदैव देश, धर्म औ' आन परिचायिका। ममता, स्नेह वात्सल्य, दया, क्षमा साक्षात रूप। नारी नदी सी जीवनदायिनी है गति

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