कोरोना / देशभक्ति / सुविचार / प्रेम / प्रेरक / माँ / स्त्री / जीवन




लघुकथा

धन्य - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
प्रातिभ की सर्विस लगे जुमा-जुमा एक साल बीता था कि उसके माता पिता को उसके विवाह की चिंता सताने लगी। वे अपनी जात बिरा
तापत्रय - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
सरकारी कार्यालय यानि सार्वजनिक स्थल। उसमें अप्रतिम सौंदर्य था। वह आशुलिपिक थी। वहाँ तरह तरह के लोग आते थे। कुछ की
सज़ा - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
उसने सरकारी नौकरी के लिए आवेदन किया। काॅल लेटर मिलने के पश्चात उसने परीक्षा मेरिट मे पास की। उसे नियुक्ति प्रमाण प
अटूट बंधन - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि :
पति-पत्नी का रिश्ता सामंजस्य की डोर से बंधा होता है। उनमें अक्सर तूँ-तूँ मैं-मैं, नोंक-झोंक होती थी। लगता था सारा पा
काल्पनिक समाज - अविनाश ब्यौहार
  सृजन तिथि : 2019
सारी कालोनी के लोग यह जानते थे कि वह परिवार बहुत ही सुसभ्य और सुसंस्कृत है। यह सब देखकर उनके परिवार के प्रति मेरी ज
मित्र - शमा परवीन
  सृजन तिथि : 15 अप्रैल, 2002
"अरे तुम यहाँ बैठे हो मित्र! मैं तुम से मिलने तुम्हारे घर गया था।" "पढ़ाई करने के लिए यही जगह अच्छी लगती है। यहाँ मैं
आँखों का तारा - अजय कुमार 'अजेय'
  सृजन तिथि : 21 दिसम्बर, 2021
पूस की कड़कड़ाती ठंडी काली स्याह रात में दूर एक बिंदु टिमटिमा रहा था। कुछ सूझ न रहा था। मैं अंदाज़े से रोशनी की ओर बढ
मानसिकता - सुधीर श्रीवास्तव
  सृजन तिथि : 4 दिसम्बर, 2021
पद्मा इन दिनों बहुत परेशान थी। पढ़ाई के साथ साथ साहित्य में अपना अलग मुक़ाम बनाने का सपना रंग ला रहा था। स्थानीय से ले
ख़ामोशी - सुधीर श्रीवास्तव
  सृजन तिथि : 27 मई, 2021
आज आप सुबह से बहुत चुपचाप हैं। क्या बात है? तबियत तो ठीक है न? रमा ने अपने पति राज से पूछा। राज बोले- नहीं लखन की माँ। ब
दोष किसका? - सुधीर श्रीवास्तव
  सृजन तिथि : 13 अप्रैल, 2020
आज रमा को अपनी भूल का बहुत पछतावा हो रहा था।आज रह रह कर कर उसे वह दिन याद आ रहा था, जब उसने माँ-बाप की चिंता में और पति क
अंतर्द्वंद - सुधीर श्रीवास्तव
  सृजन तिथि : 23 अगस्त, 2021
लंबी प्रतीक्षा के बाद आख़िर वो दिन आ ही गया और उसने सुंदर सी गोल मटोल बेटी को जन्मदिन दिया। सब बहुत ख़ुश थे। यहाँ तक की
आपके लिए - सुधीर श्रीवास्तव
  सृजन तिथि : 2020
रीमा ससुराल से विदा होकर पहली बार मायके आई। मांँ बाप भाई बहन सब बहुत ख़ुश थे। हों भी क्यों न? अपनी सामर्थ्य से ऊपर जाक
पाँच अँगुलियाँ - डॉ॰ सत्यनारायण चौधरी 'सत्या'
  सृजन तिथि : मार्च, 2021
कहावत है पाँचो अँगुलियाँ बराबर नहीं होती। इसी बात पर सभी अँगुलियों में विवाद हो गया। हर एक अँगुली अपनी उपयोगिता गि
पर्दे के पीछे - सीमा 'वर्णिका'
  सृजन तिथि : 17 सितम्बर, 2021
शास्त्री मैदान खचाखच भरा था हिंदी पर परिचर्चा चल रही थी। "हिंदी हमारी मातृभाषा है। इसका भाव सौंदर्य अप्रतिम है," वि
विद्यालय जाना है - शमा परवीन
  सृजन तिथि : 1 सितम्बर, 2021
एक प्यारा सा गाँव था। उस गाँव मे प्यारा सा विद्यालय था। उस विद्यालय मे सोनू नाम का एक बालक पढ़ता था। वह प्रतिदिन वि
एक बच्चे का मन - संजय राजभर 'समित'
  सृजन तिथि : 4 अगस्त, 2021
"माँ क्या कर रही हो" "कुछ नही बेटा, दादा तुम्हारे बूढ़े हो गए हैं और आज कुछ मेहमान आ रहे हैं, तुम्हारा जन्मदिन है बेटा।
कामयाबी का परिणाम - विपिन दिलवरिया
  सृजन तिथि : 1 जुलाई, 2021
एक छोटे से गाँव की बात है जहाँ चरनदास का परिवार रहता था जिसके दो बेटे राम और श्याम थे। राम और श्याम की माता कमला देवी
कोख का बँटवारा - अंकुर सिंह
  सृजन तिथि : जून, 2021
रामनारायण के दो बेटों का नाम रमेश और सुरेश है। युवा अवस्था में रामनारायण के मृत्यु होने के बाद उनकी पत्नी रमादेवी
सदा सुखी रहो बेटा - सुषमा दीक्षित शुक्ला
  सृजन तिथि : जून, 2021
रिटायर्ड इनकम टैक्स ऑफिसर कृष्ण नारायण पांडे आज अपनी आलीशान कोठी में बहुत मायूसी महसूस कर रहे थे, क्योंकि उनकी दो
संविदा शिक्षक का दर्द - शमा परवीन
  सृजन तिथि : 1 फ़रवरी, 2014
मास्टर साहब हमारा बक़ाया कब दोगे? भाई दे दूँगा तनख्वाह आने दो। अगर आप हमारे मुन्ने को कुछ दिन पढ़ाये ना होते तो कसम स
निरपेक्ष - ममता शर्मा 'अंचल'
  सृजन तिथि : 2021
अब क्या लिखा है पत्र में तेरी मैम ने? ओह! पत्र नहीं मैसेज में? पत्रों के ज़माने अब कहाँ रहे! मैसेज आते-जाते हैं अब तो मोब

Load More

            

रचनाएँ खोजें

रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें