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कविता

भरोसा ख़ुद पर - रविंद्र दुबे 'बाबू'
  सृजन तिथि : 4 अगस्त, 2022
विश्वास का पौधा बोना चाहा, मिट्टी जो वफ़ादार नहीं, उग न पाया पारदर्शिता पानी से, सिखलाती निर्मल रहे पर, कुछ छद्म विभ
आज़ादी का अमृत महोत्सव - डॉ॰ सत्यनारायण चौधरी 'सत्या'
  सृजन तिथि : 15 अगस्त, 2022
आओ सब मिल कर मनाएँ उत्सव, आज़ादी का अमृत महोत्सव। साल पचहत्तर बीते हैं अभी तक, नाम भारत का गूँज रहा जल थल नभ तक। उड़
मैं भारत हूँ भरत वंश का - राघवेंद्र सिंह
  सृजन तिथि : 13 अगस्त, 2022
मैं भारत हूँ भरत वंश का, मेरा गौरव गान सुनो। अलंकार से सदा सुशोभित, मेरा तुम अभिमान सुनो। स्वाभिमान के चिन्हों पर
स्वतन्त्रता आव्हान - रविंद्र दुबे 'बाबू'
  सृजन तिथि : 8 अगस्त, 2022
मातृभूमि की पावन माटी, का अब तिलक लगाना है, खोई गौरव जग जननी का, फिर से अलख जगाना है l सोन चिरैया की ख़ातिर, मरदानी बन र
धरा से शिखर तक तिरंगा - अभिषेक अजनबी
  सृजन तिथि : 12 अगस्त, 2022
यह धरा है स्वाभिमान की, यह धरा है हनुमान की। इस धरा की बात निराली, यहाँ की हर लड़की है काली। इस धरती से टकराने की हर म
लिख दे कलम ओ प्यारी - राघवेंद्र सिंह
  सृजन तिथि : 14 अगस्त, 2022
जिस राह वो चली थी, भारत की नौजवानी। लिख दे कलम ओ प्यारी, मेरे देश की कहानी। जिस राह वो चले थे, आज़ाद चंद्रशेखर। उस र
ये आज़ादी का अमृत महोत्सव - गणपत लाल उदय
  सृजन तिथि : 11 अगस्त, 2022
ये आज़ादी का अमृत महोत्सव सबको मनाना है, जान से प्यारा यह तिरंगा हम सबको फहराना है। उनके पदचिन्हों पर आज हम सभी को च
आज़ादी के पचहत्तर साल - अखिलेश श्रीवास्तव
  सृजन तिथि : जुलाई, 2022
हुई पचहत्तर की आज़ादी अब नई अलख जगानी होगी, देश के सभी युवाओं को अब इसकी शान बढ़ानी होगी। शहीदों की क़ुर्बानी की हम
रक्षा बंधन - अखिलेश श्रीवास्तव
  सृजन तिथि :
भैया रेशम के धागे का बंधन भूल न जाना, रक्षाबंधन के दिन भैया बहिन को नहीं भुलाना। घर में रहकर बचपन में हम कितनी धूम
गाँव का बचपन - अखिलेश श्रीवास्तव
  सृजन तिथि :
गाँव में बीते बचपन का मुझे दृश्य दिखाई देता है, अपने गाँव का वो प्यारा मुझे स्वप्न दिखाई देता है। काँव-काँव कौओं
गीता सार - गोकुल कोठारी
  सृजन तिथि : 22 अप्रैल, 2022
धर्म विरुद्ध है नीति जाकी कोई टार सका नहीं विपदा वाकी भूल गया तू एक ही क्षण में किस कारण तू खड़ा है रण में समझ यहाँ
बहना का प्यार - रविंद्र दुबे 'बाबू'
  सृजन तिथि : 15 जुलाई, 2022
झगड़े मुझको बहना ताड़े, दुश्मन सी इतराती है, ख़ुद बिखरे, गले लगाती, फिर पुचकार मनाती है। छेड़े मुझको करे शृंगार, मान क
माँ याद तेरी जब आती है - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
  सृजन तिथि : 8 मई, 2022
माँ क्या लिखूँ मैं तुम पर रब, तुम में ही ख़ुद को पाता हूँ। व्यक्तित्व तुम्हीं अस्तित्व सकल, माँ ममतांचल सुख देता है
यह दर्द - धर्मवीर भारती
  सृजन तिथि :
ईश्वर न करे तुम कभी ये दर्द सहो! दर्द, हाँ अगर चाहो तो इसे दर्द कहो; मगर ये और भी बेदर्द सज़ा है ऐ दोस्त! कि हाड़-हाड़ च
बाक़ी कविता - कुँवर नारायण
  सृजन तिथि :
पत्तों पर पानी गिरने का अर्थ पानी पर पत्ते गिरने के अर्थ से भिन्न है। जीवन को पूरी तरह पाने और पूरी तरह दे जाने के
घर का रास्ता - मंगलेश डबराल
  सृजन तिथि :
कई बार मैंने कोशिश की इस बाढ़ में से अपना एक हाथ निकालने की कई बार भरोसा हुआ कई बार दिखा यह है अंत मैं कहना चाहता
हिन्दी के गौरव निशा इंदु : प्रेमचंद - राघवेंद्र सिंह
  सृजन तिथि : 31 जुलाई, 2022
हे! हिन्द धरा के अमर सूर्य, हिन्दी के गौरव निशा इंदु। है नमन तुम्हें, हे! कलमकार, हिन्दी प्राँगण के केंद्र बिंदु। त
रिश्तों को नमन - सुधीर श्रीवास्तव
  सृजन तिथि : 24 जुलाई, 2022
अजूबा सा लगता है पर सच है और अप्रत्याशित भी, न भेंट न मुलाक़ात न ही जान, न पहचान न कोई रिश्ता, न कोई संबंध। फिर भी अपना
वैशाख महात्म - अनिल भूषण मिश्र
  सृजन तिथि : 22 मई, 2022
दूजा माह वैशाख है आया, कृषकों को अति व्यस्त बनाया। शुरू हुई फ़सलों की कटाई, सबके चेहरे पर मुस्कान है छाई। सूरज ने भी
महाकवि गोस्वामी तुलसीदास - गणपत लाल उदय
  सृजन तिथि : 4 अगस्त, 2022
महाकवि और महान-संत थें आप तुलसीदास, श्रीराम कथा लिखकर बनें आप सबके ख़ास। जिनका जप करता है आज विश्व का नर नार, प्रेम-
चैत्र महात्म - अनिल भूषण मिश्र
  सृजन तिथि : 27 मार्च, 2022
प्रथम माह चैत्र है आया, रंग गुलाल से यह सजा सजाया। नए साल की ख़ुशियाँ लाया, नवरात्रि की है धूम मचाया। खेतों को सोने स
वो लड़की - प्रशान्त 'अरहत'
  सृजन तिथि : जनवरी, 2020
वो लड़की जिससे मेरे दिल का था कारोबार चला करता। वो लड़की जिससे मिलकर मन उपवन मेरा खिला करता। वो लड़की जब कुछ कहती तो ब
दवा और दुआ - सुधीर श्रीवास्तव
  सृजन तिथि : 28 जून, 2022
दवा और दुआ सिक्के के दो पहलुओं की तरह हैं दवा तन पर असर करती है, दवाएँ अपरिहार्य हो सकती हैं लेकिन बिना धन के दवाएँ
काश! मेरा हृदय पाषाण खंड होता - प्रवीन 'पथिक'
  सृजन तिथि : 22 अप्रैल, 2022
काश! मेरा हृदय पाषाण खंड होता, तोड़ देता वो सारी बेड़ियाँ; जो मिथ्या प्रेम का दामन पकड़, झकझोड़ती हैं मासूम हृदयों
हरियाली तीज - गणपत लाल उदय
  सृजन तिथि : 6 जुलाई, 2021
यें तीज का आया है प्यारा त्यौहार, बादलों से बरस रहीं हल्की फुहार। सात रंग में रंगा है प्यारा आसमान, चारों और छाया य
मौत - रमेश चंद्र बाजपेयी
  सृजन तिथि :
मौत तेरे कई बहाने, न जाने किस बहाने अपने पास बुलाए। न उम्र का बंधन, बाल हो या हो प्रोढ, जिसे तू न सुलाए। राजा हो या
नाग पंचमी की धूम - रविंद्र दुबे 'बाबू'
  सृजन तिथि : 1 अगस्त, 2022
सूरज झाँके भोर भए, गली-गली शोर हुआ। कीचड़ में हुए तर बतर, पहलवान भी मग्न हुआ।। नए नए पकवान बने, झांज मंजीरा भी बजे। न
भ्रुण की ख़्वाहिश - रविंद्र दुबे 'बाबू'
  सृजन तिथि : 27 जुलाई, 2022
मैं हूँ छोटी अधकली, कोख में माँ से लिपट रही, जन्म दात्री हिम्मत करती, दुनिया को डपट रही। मुझको भी इस धरा का, आनंद लेन
दुआ - रमेश चंद्र बाजपेयी
  सृजन तिथि :
जहाँ दवा काम करना बंद कर दे, वहाँ दुआ ही काम आती है। श्रम के निरंतर प्रयासो से, हिय की मृद कयासो से, दुआ सहज ही निकल
भारत का वह अमर सितारा - राघवेंद्र सिंह
  सृजन तिथि : जुलाई, 2022
भारत के उस अमर व्योम पर, चमका एक सितारा था। अंग्रेजों के सम्मुख झुकना, जिसको नहीं गँवारा था। पराधीनता की रातों मे

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