कोरोना / देशभक्ति / सुविचार / प्रेम / प्रेरक / माँ / स्त्री / जीवन

तम जहाँ में पल रहा है (ग़ज़ल)

तम जहाँ में पल रहा है,
रौशनी को छल रहा है।

मैं करूँ तो क्या करूँ अब,
आग है कुछ जल रहा है।

सूर्य भी दिन भर चला औ,
शाम होते ढल रहा है।

रात कितनी बेहया है,
गो ग़लत कुछ चल रहा है।

आँख में आँसू भरे हैं,
वक्त ही तो खल रहा है।


अविनाश ब्यौहार
सृजन तिथि : 7 नवम्बर, 2021
अरकान : फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन
तक़ती : 2122 2122
            

रचनाएँ खोजें

रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें