साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3587
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
ज़माना तो सितमगर है, हवाओं का यहाँ डर है। जहाँ में बस झमेले हैं, अमन को चाहने घर है। डकैती पड़ गई होगी, अगरचे पास में ज़र है। बहारें क्यों बुलाएँगीं, समय को मान लो खर है। दुआएँ साथ लेता जा, अमंगल सामने गर है।
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