वज़ीर (घनाक्षरी छंद)

हार का ना डर कोई
जीत का ना वादा है,
दुनिया ही अपनी है
अपना इरादा है।

हाथ वही काँपते हैं
डर की लहर पे,
जिनको यकीन घर
उनका बुरादा है।

साहसी है तन मेरा
चीर दे कफ़न को,
लाल हूँ मैदान का जो
धारे भेष सादा है।

उसकी ज़ुबान कहे
मुझको उजेड़ देगी?
ख़्वाब देख सरकार
सिखतड़ प्यादा है।।


  • विषय : -  
लेखन तिथि : 2026
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ज्ञान दीन


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