साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3615
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
घर-घर पहचाने है शीशम-सागौन! महिमा है इनकी भी कुछ कम नही! इमारती लकड़ी है बेदम नही! भोर उठी कर रही नीम का दातौन! होता है पेड़ से स्वच्छ परिवेश! मौसम बदलेगा बार-बार भेष! सभी फूल फूले हैं बिरला जासौन!
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