साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3604
कटनी, मध्य प्रदेश
1979
नदी से बतियाते हुए घाट सिरा देते अपनी पीड़ाएँ रात के एकांत में उदार जल सोख लेता घाट के आस्तिक दुःखों को एक कविता में नमी की भाप उठती है
अगली रचना
पिछली रचना
साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें