सभी हैं (कविता)

सभी हैं,
कोई भी नहीं।

बेकरारी,
बेचैनी,
कैसे कैसे इंतज़ारी के दुख,
फिर से शून्य है,
और अंक कोई भी नहीं,
सभी हैं,
कोई भी नहीं।

इस बादल का,
दूर हट जाना बेहतर,
जब मुरझा उठी फ़सल,
बूँदों की प्रतीक्षा में,
आँसू हैं,
और कोई बूँद भी नहीं

सभी हैं,
कोई भी नहीं।


  • विषय : -  
लेखन तिथि : 2026
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