साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
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बरेली, उत्तर प्रदेश
1940
फूल ख़ुद अपने हुस्न में गुम है उस को कब चाहने की फ़ुर्सत है आओ काँटों से दोस्ती कर लें जिन को हमदर्द की ज़रूरत है
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