साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
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अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
1954
पेड़ों के पास ऐसी कोई भाषा नहीं थी जिसके ज़रिए वे अपनी बात इंसानों तक पहुँचा सकें शायद पेड़ बुरा मान गए किसी बात का वे बीज कम उगाने लगे और बीजों में उगने की इच्छा ख़त्म हो गई बचे हुए पेड़ों की उदासी देखी जा सकती है
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