साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3604
अररिया, बिहार
1921 - 1977
मुझे तुम मिले! मृतक-प्राण में शक्ति-संचार कर; निरंतर रहे पूज्य, चैतन्य भर! पराधीनता—पाप-पंकिल धुले! मुझे तुम मिले! रहा सूर्य स्वातंत्र्य का हो उदय! हुआ कर्मपथ पूर्ण आलोकमय! युगों के घुले आज बंधन खुले! मुझे तुम मिले!
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