साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3615
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
सूरज ने धूप से कहा मौसम रंगीन हो गया। अब चलने लगी हैं चुलबुली हवाएँ। आपस में पेड़ जाने क्या बतियाएँ।। मधुप जो है फूल पर झुका जुर्म संगीन हो गया। रोज़-रोज़ होती पुनर्नवा भोर है। झलका सन्नाटे में कोई शोर है।। ऋतुओं का आलम है कि पतझर दीन-हीन हो गया।
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