साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3604
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
झाड़ी-झुरमुट-पेड़ हैं मानसून आया। लगी चाँदनी चंदन जैसे। होता है अभिनंदन जैसे॥ झोला भर भर है देखा परचून आया। मिट्टी के हैं खेल खिलौने। माल बिका है औने-पौने॥ बंद लिफ़ाफ़े में मानो मज़मून आया।
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