मानलो यार हमें नशा होगा,
बे-ख़ुदी में ख़ुदा कहा होगा।
कल को नस्लें नई ये सोचेंगी,
आदमी किस तरह रहा होगा।
राज़ खोलें अगर इजाज़त हो,
रहने दो हादसा नया होगा।
ताज उसको लगा खिलौने सा,
देखना तुम यहीं धरा होगा।
फ़रिश्ते हर तरफ़ अमन के हैं,
ख़ून कैसे यहाँ बहा होगा।
मरते मरते भी ये कहा हमने,
क़ातिलों आपका भला होगा।

साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
सहयोग कीजिएप्रबंधन 1I.T. एवं Ond TechSol द्वारा
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें
