लिया-दिया तुमसे मेरा था,
दुनिया सपने का डेरा था।
अपने चक्कर से कुल कट गए,
काम की कला से हट हट गए,
छापे से तुम्हीं निपट पट गए,
उलटा जो सीधा ढेरा था।
सही आँख तुम्हीं दिखे पहले,
नहले पर तुम्हीं रहे दहले,
बहते थे जितने थे बहले,
किसी जीभ तुमको टेरा था।
तभी किनारे लगा दिया है,
जहाँ करारा गिरा दिया है,
कैसा तुमने तरा दिया है,
गहरा भँवरों का फेरा था।

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