आगरे का धोबी एक दिन राजधानी दिल्ली आया,
दिल्ली वालों से यों बोला दुखी होके मन में—
गाँव-गाँव भटका मैं नगर-नगर गया,
वन में मिला न मुझे मिला उपवन में,
टीले पर चढ़कर ढेंचूँ-ढेंचूँ बोलता था,
बड़ा होनहार दिखता था बचपन में,
पिछले चुनावों से वो मेरा गधा लापता है,
ढूँढ़ने आया हूँ उसे संसद भवन में।

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