जगत के मालिक (गीत)

सबका एक विधाता जग में,
जिसके सारे विधान।
आत्मा सत के साथ सदा से,
दल बदले इंसान।।

जगत के मालिक हैं भगवान।
जगत के मालिक हैं भगवान।।
जगत के मालिक हैं भगवान।
जगत के मालिक हैं भगवान।।

हमने देखी लाख बुराई,
करनी पीछा छोड़ न पाई।
नीयत जिनकी साफ़ सफ़र में,
नियति उनके साथ डगर में।

सादगी सबने बड़ी बताई,
चालाकी करे बाँस बजाई।
हाथ भरे होकर क्यों खाली?
मन की ना भर पाई थाली।

जीवन छल का खेल नहीं सुन
भूल करे नादान।
आत्मा सत के साथ सदा से
दल बदले इंसान।।

जगत के मालिक हैं भगवान।।
जगत के मालिक हैं भगवान।
जगत के मालिक हैं भगवान।
जगत के मालिक हैं भगवान।।

भाव ग़ुबार के स्वप्न भारी,
कड़वी बोली बड़ी बीमारी।
उम्र तेरी बस साँस सहारे,
मौत खड़ी मस्तक के द्वारे।

वैभव है धरती की माया,
साँस गई जग हुआ पराया।
अपनी क़ीमत तू ना समझा,
औरों की उलझन में उलझा।

खाली हैं तेरे हाथ अभी भी
कर संचित निधान।
आत्मा सत के साथ सदा से
दल बदले इंसान।।

जगत के मालिक हैं भगवान।
जगत के मालिक हैं भगवान।।
जगत के मालिक हैं भगवान।
जगत के मालिक हैं भगवान।।


लेखन तिथि : 2026
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