गुरु ज्ञान का अमृत, जिसका न कभी अंत।
अज्ञानता गुरुवर, करते हरण-हरण॥
दीप ज्ञान का जलाए, अंधकार को मिटाए।
नमन वंदन गुरु, कमल चरण-चरण॥
कर्म गति सीखलाए, प्राणशक्ति को बढ़ाए।
ज्ञान का प्रसाद सभी, करले वरण-वरण॥
मातु पितु गुरुवर, गुरुज्ञान तरूवर।
विद्या धन सर्वोपरि विनय करण-करण॥
बुद्धि स्वामि कहलाए, ज्ञान सरिता बहाए।
दुःख हर्ता सुख कर्ता, गुरु की शरण-शरण॥
गुरुवर देव धाम, कोटि-कोटि है प्रणाम।
पावन शरणा गति, धीरज धरण-धरण॥
अवगुण का शमन, अज्ञानता का दमन।
विद्या दान अनमोल, संतोस भरण-भरण॥
गुरु भाग्य के विधाता, जगत प्रकाश दाता।
जय जय गुरुवर, अनंत किरण-किरण॥

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