साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3615
पठानकोट, पंजाब
1975
गुम-सुम तन्हा बैठा होगा सिगरेट के कश भरता होगा उस ने खिड़की खोली होगी और गली में देखा होगा ज़ोर से मेरा दिल धड़का है उस ने मुझ को सोचा होगा मैं तो हँसना भूल गया हूँ वो भी शायद रोता होगा ठंडी रात में आग जला कर मेरा रस्ता तकता होगा
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