साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3604
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
बाग में पड़ रहे हैं तितली के पाँव! फूलों में हैं ख़ुशबुएँ आकर बसी! बबूल की है बाग से रस्साकसी!! तैरता है हवा में सपनों का गाँव! बागों में खिंचा है गन्ध का वितान! अलि की गुंजन का है कोई विधान!! महकती है जास्मिन सी गुलों की छाँव!
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