एक हमारा ऊँचा झंडा, एक हमारा देश,
इस झंडे के नीचे निश्चित एक अमिट उद्देश।
देखा जागृति के प्रभात में एक स्वतंत्र प्रकाश;
फैला है सब ओर एक-सा एक अतुल उल्लास।
कोटि-कोटि कंठों में कूजित एक विजय-विश्वास,
मुक्त पवन में उड़ उठने का एक अमर अभिलाष!
सबका सुहित, सुमंगल सबका, नहीं वैर-विद्वेष,
एक हमारा ऊँचा झंडा, एक हमारा देश।
कितने वीरों ने कर-करके प्राणों का बलिदान,
मरते-मरते भी गाया है इस झंडे का गान।
रक्खेंगे ऊँचे उठ हम भी अक्षय इसकी आन,
चक्खेंगे इसकी छाया में रस-विष एक समान।
एक हमारी सुख-सुविधा है, एक हमारा क्लेश,
एक हमारा ऊँचा झंडा, एक हमारा देश।
मातृभूमि की मानवता का जाग्रत जयजयकार;
फहर उठे ऊँचे से ऊँचे यह अविरोध, उदार।
साहस, अभय और पौरुष का यह सजीव संचार;
लहर उठे जन-जन के मन में सत्य अहिंसा प्यार!
अगनित धाराओं का संगम, मिलन-तीर्थ-संदेश:
एक हमारा ऊँचा झंडा, एक हमारा देश।

साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
सहयोग कीजिएप्रबंधन 1I.T. एवं Ond TechSol द्वारा
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें
