साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3615
अयोध्या, उत्तर प्रदेश
1927 - 2017
दुनिया जैसी है और जैसी उसे होना चाहिए के बीच कहीं वह एक लगातार बेचैनी है।
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