'छोड़ना'
अति आवश्यक है,
नयापन प्राप्त करने के लिए।
जब फूल छोड़ते हैं डाली
तो वे ईश्वर पर चढ़कर
धन्य हो जाते हैं,
जब बूँदें छोड़ती हैं आसमान
तो सूखी ज़मीन को
कर देती हैं हरा-भरा,
जब चिड़िया छोड़ देती है
अपना घोंसला
तो उड़ने लगती है स्वच्छन्द
आसमान में,
जब छोड़ देती है नदी
पर्वतों का मोह
तो बहने लगती है
लोगों को समृद्ध करते हुए,
जब कोई 'अशोक',
दुःखी होकर के
कलिंग की त्रासदी से
छोड़ देता है हिंसा,
तो बन जाता है 'महान',
इसीलिए मैं कहता हूँ, कि –
''नयापन प्राप्त करने के लिए
अनिवार्य हो जाना चाहिए,
प्रेम करना और उसके बाद छोड़ देना।''

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