साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3615
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
बेचैन है चाँद दूधिया! निशानी दिया रूमाल की! यादें अधरों की गाल की! देहरी पर ख़्वाब मूंगिया! छूट गयी ऊँटी की शाम! पसीने से तर बतर घाम! लग रहे हैं दिवस ठूंठिया!
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