बहुत देर से सोकर जागी
दिशा-वधू मौसम के गाँव
अत: डरी लज्जित-सी पहुँची
छूने दिवस-पिया के पाँव
आँखों वाली क्षितिज-रेख पर
काला-सूरज उदित हुआ
धरती का कर निज-दुहिता के
पाँव परस कर मुदित हुआ
कंपित शब्द-गोट ने सहसा
चला एक ध्वनिवाही दाँव
बहुत देर से सोकर जागी
दिशा-वधू मौसम के गाँव
मौन-शीत पसरा घर-आँगन
की गतिविधियाँ सिमट गईं,
किरणों की दासियाँ कुहासे
के अनुसर से लिपट गईं
दृष्टि अराजक हुई, छा गई
नभ से आपदकाली छाँव
बहुत देर से सोकर जागी
दिशा-वधू मौसम के गाँव

साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
सहयोग कीजिएप्रबंधन 1I.T. एवं Ond TechSol द्वारा
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें
