साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3604
आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश
1919 - 2002
बहारो मेरा जीवन भी सँवारो, कोई आए कहीं से यूँ पुकारो। तुम्हीं से दिल ने सीखा है तड़पना, तुम्हीं को दोश दूँगी ऐ नज़ारो। सजाओ कोई कजरा लाओ गजरा, लचकती डालियो तुम फूल वारो। रचाओ मेरे इन हाथों में मेहंदी, सजाओ माँग मेरी या सिधारो। न जाने किस का साया दिल से गुज़रा, ज़रा आवाज़ देना राज़दारो।
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