तेरे बाद कुछ भी ना था, दिल में फिर भी धड़कन रही,
हर इक बात में तू था, साँसों में तेरी उलझन रही।
ख़्वाबों में जो रंग भरे, जागे तो सब फीके लगे,
नींदें भी रूठीं मुझसे, आँखों में बस इक तपन रही।
हमने हर रिश्ता बख़्शा, पर तू ही ख़ुदा बन गया,
तेरा नाम लिया हर पल, पर दिल में एक उलझन रही।
'जानिब' तुझसे दूर हुए, पर ये दूरी झूठी थी,
जिस्म जुदा हो सकता है, रूहों में फिर भी छन-छन रही।

साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
सहयोग कीजिएप्रबंधन 1I.T. एवं Ond TechSol द्वारा
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें
