'अकेलापन' कठोर सज़ा,
'एकांत' एक है बरदान।
एक जैसे दिखने वाले,
अंतर ज़मीन आसमान।
एकल छटपटाहट घबराहट,
एकांत लाभ शांति आराम।
बाहरी दुनिया दृश्य अकेला,
भीतर ह्रदय एकांत आराम।
मानव जीवन कुछ और नहीं,
यात्रा अकेलापन से एकांत।
जीवनपथ की यह डगर अजूबी,
राह-राही-मंज़िल एकल एकांत॥

साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
सहयोग कीजिएप्रबंधन 1I.T. एवं Ond TechSol द्वारा
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें
