साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3619
मधुबनी, बिहार
2004
आसमान से पूछी गहराई, सोए समुद्र से उसकी लंबाई। तारों से उनकी गिनती, सूरज से उसकी परछाई। मिला जवाब तब मुझे, जब मैंने अपनी चेतना जगाई।
अगली रचना
पिछली रचना
साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें