साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
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इटावा, उत्तर प्रदेश
1971
जाते हुए उसने कहा कि आते हैं तभी मुझे दिखा सुबह के आसमान में हँसिए के आकार का चंद्रमा जैसे वह जाते हुए कह रहा हो कि आते हैं
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