साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3574
इन्दौर, मध्य प्रदेश
1946 - 2009
आसमान, तुम्हारे कितने तारे तुम्हें परेशान करते हैं, जंगल, तुम कितने पेड़ों से उदास होते हो नदी, तुम्हारा कितना पानी दरकिनार हो जाता है? मैं आसमान का समकालीन तारों का हमराह नहीं जंगल का बाशिंदा हूँ पेड़ों पर नहीं चढ़ता लकड़हारा भी नहीं नदी के मर्मस्थल का साकिन मछलियों के उल्लास से ग़ाफ़िल।
अगली रचना
पिछली रचना
साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें