साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3619
आगरा, उत्तर प्रदेश
1797 - 1869
आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे, ऐसा कहाँ से लाऊँ कि तुझ सा कहें जिसे।
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