कोरोना / देशभक्ति / सुविचार / प्रेम / प्रेरक / माँ / स्त्री / जीवन

वो चुपके से बोल गए (ग़ज़ल)

वो चुपके से बोल गए,
झट मिसरी सी घोल गए।

हमने जब भी सच पूछा,
दे बातों में झोल गए।

अबतक छुपी मुहब्बत में,
करते टालमटोल गए।

बँधी हुई थी जो कस कर,
मन की गठरी खोल गए।

अपनी मीठी बोली से,
दिल से दिल को तोल गए।

मोल नहीं उन लफ़्ज़ों का,
जो कहकर अनमोल गए।

सुनते ही 'अंचल' अरमाँ,
मुस्काकर फिर डोल गए।


ममता शर्मा 'अंचल'
सृजन तिथि : 27 मार्च, 2022
अरकान : फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेल फ़अल
तक़ती : 22 22 21 12
            

रचनाएँ खोजें

रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें