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तेरे बिना (नज़्म) Editior's Choice

तेरे बिना रो पड़ता हूँ
तुझे राज़ी करने के लिए,
तेरे बिना जीवन मानिंद जहन्नुम हैं।
तू नहीं तो जीवन का हर सुख दुःख हैं।
करता हूँ बेइंतहा प्यार तुझे,
फिर भी हो जाती हैं ग़लतियाँ मुझसे।
तू जब ग़ुस्सा हो जाती हैं,
नहीं मन लगता कहीं, रो पड़ता हूँ,
अजीबोग़रीब तड़प सी कुलबुलाने लगती हैं,
हौले हौले मेरा दम घुटता हैं,
तो फिर ख़ुद को बचाने मुझे आना होता हैं तेरे दर पर।
चेहरे को आँसूओं के ख़ंजर बेतहाशा मारकर,
सिसकता हूँ तेरे सामने ख़ुद को लहूलुहान कर,
दुहाई माँगता हूँ यारब,
तू ही तो हैं मेरा रब।
हो जाती हैं ग़लती,
मैं भी तो हूँ फ़क़त आदमी।
तेरे बिना नहीं चाहिए
जीवन की कोई जुस्तुजू,
तेरे बिना हर पल में छिपा कोई कसाब हैं।
मुझें माफ़ कर दे,
मुझें फिर हँसा दे, मुझें प्यार दें,
तू ही तो मेरा जनाब हैं,
यही मेरी अब अंतिम आवाज़ हैं।
तू सुन ना, मेरी सिसकती,
डूबती, काँपती आवाज़ को,
देख, कितना दरिद्र हूँ मैं तेरे बिना।
मैंने सहा हैं मुफ़लिसी का दंश,
तू मेरी होकर मुझें अमीर कर दें।
मेरी आवाज़ की गहराई में उतरकर
मेरे दिल में गोते तो लगा,
इस आत्मा में मैंने सिर्फ़ तेरी ही तस्वीर ली है सजा।
तू मेरे हर ख़्वाब की ताबीर हैं।
इस सफ़र में मोहब्बत का मुक़ाम मुझे अब मिला हैं,
ख़ुद को तपती धूप तो तुझे भिनसार कहा हैं।
मेरी हर कविता को तुमनें अपने दिल में जगह दी,
इससे मेरे सम्मान को तूने चौगुना मान दिया हैं।
तू मेरी हमसफ़र हैं
तेरे सर-ए-राह अब मुझे चलना हैं,
तुम जैसे रखोगी अब मुझे रहना हैं।
तू कितनी अच्छी हैं पाक हैं नायाब हैं,
तू मेरा कोई मुकम्मल ख़्वाब हैं।
तू प्राण हैं, पहला प्यार हैं, संजीवनी हैं, मुस्कान हैं,
आशा हैं, जीवन हैं, ख़्वाब हैं,
मेरी आँखों में बहता तू ही श्वेत आब है।
तेरा मुझसे एक पल के लिए भी नाराज़ होना,
ख़ुद में ये इल्म होता हैं,
कि बिना तेरे मेरा सफ़र नहीं कटने वाला,
मेरी हाँफती, टूटती साँसे कहती हैं,
तू राज़ी हो जा न,
तू मुस्कुरा दे न यार,
क्यूँ अपने दीवाने को मौत की सज़ा सुना रही हैं?


कर्मवीर सिरोवा
सृजन तिथि : मार्च, 2021


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