कोरोना / देशभक्ति / सुविचार / प्रेम / प्रेरक / माँ / स्त्री / जीवन

नज़ारे (कविता)

देखते ही खूबसूरत नज़ारे...
एक चित्रकार उतार लेता है
नज़ारों को कैनवास पर,
एक फ़ोटोग्राफ़र क़ैद कर लेता है
उन नज़ारों को कैमरे में,
और
एक कवि अपनी कविता में।।

और मैं...
देखता रह जाता हूँ
उन नज़ारों को,
उन में खोए हुए
दिल में उतारता चला जाता हूँ,
उनमें जीता चला जाता हूँ।


अमित राज श्रीवास्तव 'अर्श'
सृजन तिथि : 20 मार्च, 2021
            

रचनाएँ खोजें

रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें