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लॉक लगा के रखना (कविता)

चलो अब हम चलते है,
ख़्याल अपना रख लेना।
किए मुझसे वादे पूरे कर,
मेरे यादों को बिसरा देना।।

मेरे दिल के प्रेम उमंग तुम,
तुम अपनी राह सँवार लेना।
चाह के कभी ना जुड़ सकूँ,
ऐसा इंतज़ाम तुम कर देना।।

प्रेम संग जो तुमसे सपने थे,
अबकी उसे बिखेर कर जाना।
तुम्हारे सपनो में दख़ल न हो,
सपनो का द्वार बंद कर रखना।

यदि चाहूँ तुमसे बातें करना,
अंजान बन मुँह तुम फेर लेना।
जताना चाहूँ प्रेम यदि तुमपे,
रोक मुझे, मेरा दिल तोड़ देना।

मुझ बिन अपने ख़ुशियों का,
सुंदर सा जग तुम बसा लेना।
कभी लौट आ ना सकूँ वापस,
ऐसा लॉक लगाके तुम रखना।।


अंकुर सिंह
सृजन तिथि : 18 नवम्बर, 2021
            

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