कोरोना / देशभक्ति / सुविचार / प्रेम / प्रेरक / माँ / स्त्री / जीवन

जलता जाए दीप हमारा (कविता)

मिट्टी के दीपों में भरकर
तेल-तरल और बाती,
तिमिर-तोम को दूर भगाने
को लौ हो लहराती।

मिट जाए भू का अँधियारा,
जलता जाए दीप हमारा।

हो आँधी, तूफ़ान मगर यह
दीप न बुझने पाए,
दीपक की लघु जल-जल बाती
युग-युग साथ निभाए।

धरती पर बिखरे उजियारा,
जलता जाए दीप हमारा।

ख़ुशियों के ये दीप जलें
हों पूर्ण सकल अरमान,
घटे विषमता, उर में ममता
निर्धन हो धनवान।

मिटे व्यथा, जर, क्रंदन सारा,
जलता जाए दीप हमारा।

शान्ति, सफलता की फुलझड़ियाँ
घर-घर करें प्रकाश,
न्याय, धर्म की ज्योति बिखेरे
निर्बल में विश्वास।

चमके सबका भाग्य-सितारा,
जलता जाए दीप हमारा।


अनिल मिश्र प्रहरी
सृजन तिथि : 2020
            

रचनाएँ खोजें

रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें