कोरोना / देशभक्ति / सुविचार / प्रेम / प्रेरक / माँ / स्त्री / जीवन

आशा दीप (कविता)

आओ आशा दीप जलाएँ।
अंधकार का नाम मिटाएँ।।

फूलों से महकें महकाएँ,
दुखियारों के दुःख मिटाएँ।

रूह जलाकर ज़िंदा रहना,
जीवन की तो रीत नहीं।

अंतिम हद आशा रखना,
मानव मन की जीत यही।

सूखे पत्तों से झड़ जाते,
इक दिन दुःखो के साए।

मीत हृदय को धीरज देना,
पतझड़ ही मधुमास बुलाए।

ख़ुद से कभी न रूठो मितवा,
कोई कितना तुम्हें सताए।

नदियों जैसे बहते रहना,
कोई कितनी रोक लगाए।

मरने से पहले जीना मत छोड़ो,
आओ यारों नाचें गाएँ।

आओ आशा दीप जलाएँ,
अन्धकार का नाम मिटाएँ।

सूरज से चमके चमकाएँ,
ख़ुशियाँ दोनों हाथ लुटाएँ।

आओ आशादीप जलाएँ,
अंधकार का नाम मिटाएँ।


सुषमा दीक्षित शुक्ला
सृजन तिथि : मई, 2021
            

रचनाएँ खोजें

रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें